बोली बिल्ली, आन्छी आन्छी
अरे हो गया मुझे जुकाम,
जाओ चूहों , मत ललचाओ
करना है मुझको आराम !
दूध नहीं अब चाय चलेगी,
थोडा हलवा और दवाई,
लग ना जाये आन्छी हमको,
ध्यान रखेंगे हम तो भाई !
ए चूहे , कद में तू छोटा,
छोटी है तेरी करतूत,
मेरे डर से बड़े-बडो की,
रुक जाती है चलती मूत,
चूहा बोला, चल हट बिल्ली
मुझसे पंगा लेना छोड़,
इस पड़ोस के, कई बिल्लों के,
दिए है मैंने TATTE फोड़ !
बीमार जो तू है बिल्ली,
मान ले मेरी राय है नेक,
दादागिरी नहीं चलेगी,
दूंगा घर से बाहर फेंक !
फौलादी है बाहर बैठा
इस यौवन से खेलेगा,
जब जी चाहे पुचकारेगा,
जब जी चाहे ले लेगा !
3 comments:
utna na aya maza
kyon tumne fir se wahi wakya use kiya
kyon nahi tum kuch naya try karte
is-us ke land se zyada gaharai pe dhyan dete!!! ;-)
aapke comment kaa reply diye hain apne blog pe...dhanyawaad hai....
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