बोली बिल्ली, आन्छी आन्छी
अरे हो गया मुझे जुकाम,
जाओ चूहों , मत ललचाओ
करना है मुझको आराम !
दूध नहीं अब चाय चलेगी,
थोडा हलवा और दवाई,
लग ना जाये आन्छी हमको,
ध्यान रखेंगे हम तो भाई !
ए चूहे , कद में तू छोटा,
छोटी है तेरी करतूत,
मेरे डर से बड़े-बडो की,
रुक जाती है चलती मूत,
चूहा बोला, चल हट बिल्ली
मुझसे पंगा लेना छोड़,
इस पड़ोस के, कई बिल्लों के,
दिए है मैंने TATTE फोड़ !
बीमार जो तू है बिल्ली,
मान ले मेरी राय है नेक,
दादागिरी नहीं चलेगी,
दूंगा घर से बाहर फेंक !
फौलादी है बाहर बैठा
इस यौवन से खेलेगा,
जब जी चाहे पुचकारेगा,
जब जी चाहे ले लेगा !
Tuesday, December 11, 2007
Wednesday, December 5, 2007
चिड़िया के बच्चे
चिड़िया के बच्चे सब मिलकर
एक दिन लगे मचाने शोर,
हर दिन कच्चे दाने खाकर
मम्मी हम सब हो गये बोर !
कितने हैं पकवान जगत में
तुम क्यों नहीं खिलाती हो,
वही दाल-चावल के दाने
मां की लौड़ी लाती हो!
गुस्सा हमें दिलाया तो
हम इगो पे ले लेंगे
नाना जी को ले जाकर
आसमान में पेलेंगे !
एक दिन लगे मचाने शोर,
हर दिन कच्चे दाने खाकर
मम्मी हम सब हो गये बोर !
कितने हैं पकवान जगत में
तुम क्यों नहीं खिलाती हो,
वही दाल-चावल के दाने
मां की लौड़ी लाती हो!
गुस्सा हमें दिलाया तो
हम इगो पे ले लेंगे
नाना जी को ले जाकर
आसमान में पेलेंगे !
आया मेला
आया मेला, आया मेला
आया मेला, आया मेला !
गुब्बारे हैं बड़े निराले
उजले नीले पीले काले
सजा चाट का ठेला
आया मेला, आया मेला !
मेले में है थेटर-नाच,
उसमें नाचे रंडी पांच !
थेटर-मालिक सबको पेला
आया मेला, आया मेला !
चरखी की रफ़्तार प्रचन्ड,
ठीक से बैठो मां के लन्ड !
गिर गये तो हुआ झमेला
आया मेला, आया मेला !
आया मेला, आया मेला !
गुब्बारे हैं बड़े निराले
उजले नीले पीले काले
सजा चाट का ठेला
आया मेला, आया मेला !
मेले में है थेटर-नाच,
उसमें नाचे रंडी पांच !
थेटर-मालिक सबको पेला
आया मेला, आया मेला !
चरखी की रफ़्तार प्रचन्ड,
ठीक से बैठो मां के लन्ड !
गिर गये तो हुआ झमेला
आया मेला, आया मेला !
साहु-समीर
प्रखर ग्रीष्म का विकट समय,
थी CSE की क्लास
सारे बच्चे अन्यमन्स्क से,
शिक्षक थे बिस्वास !
अग्रिम पन्क्ति के दो बच्चे
बना रहे थे नोट,
तभी अचानक पीछे कहीं,
हुआ तीव्र विस्फोट !
15 में से 12 बच्चे,
गिरे होके विक्षिप्त,
शेष में विशेष हुए
कविता करने में लिप्त !
बिस्वास को हुआ विश्वास,
है साहु की करतूत,
साहु का तो हाल बुरा था,
दिया पैन्ट में मूत !
समझ न आया पीछा-आगा,
पाद के साहु होस्टल भागा !
भांप के इनके गांड की गंध,
हुइ ISM की कैन्टीन बंद!
बंद है गूगल, बंद है याहू,
चहूं शोर है पादा साहु!
जै-जै साहु पाद-प्रचन्ड,
शीत लहर से लाते ठन्ढ !
निराशा से देते छुटकारा,
पादें आप हंसे जग सारा !
कहे फौलादी सुनो भई साहु,
प्राण-हन्ता है निकसित वायु !
थी CSE की क्लास
सारे बच्चे अन्यमन्स्क से,
शिक्षक थे बिस्वास !
अग्रिम पन्क्ति के दो बच्चे
बना रहे थे नोट,
तभी अचानक पीछे कहीं,
हुआ तीव्र विस्फोट !
15 में से 12 बच्चे,
गिरे होके विक्षिप्त,
शेष में विशेष हुए
कविता करने में लिप्त !
बिस्वास को हुआ विश्वास,
है साहु की करतूत,
साहु का तो हाल बुरा था,
दिया पैन्ट में मूत !
समझ न आया पीछा-आगा,
पाद के साहु होस्टल भागा !
भांप के इनके गांड की गंध,
हुइ ISM की कैन्टीन बंद!
बंद है गूगल, बंद है याहू,
चहूं शोर है पादा साहु!
जै-जै साहु पाद-प्रचन्ड,
शीत लहर से लाते ठन्ढ !
निराशा से देते छुटकारा,
पादें आप हंसे जग सारा !
कहे फौलादी सुनो भई साहु,
प्राण-हन्ता है निकसित वायु !
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